दुनिया के लोगों ने देखी ब्लैक होल की पहली तस्वीर - Tech1Suraj

Advertise here

ads

Hot

Thursday, April 11, 2019

दुनिया के लोगों ने देखी ब्लैक होल की पहली तस्वीर


वैज्ञानिकों ने जारी की धरती से 95 लाख करोड़ किमी दूर स्थित ब्लैक होल  तस्वीर, उप्लब्धि के गवाह बने दुनियाभर के लोग


https://tech1suraj.blogspot.com/2019/04/blog-post.html

वाशिंगटन, रायटर/प्रेरक :एस्ट्रोफिजिक्स (खगोल-भौतिकी) के क्षेत्र में बुधवार ऐतिहासिक उपलब्धि का दिन रहा।दुनिया ने पहली बार एक ब्लैक होल की तस्वीर देखी। वैज्ञानिकों ने एक साथ वाशिंगटन, ब्रसेल्स, सैंटियागो, शंघाई, टाइप और टोक्यो में इस तस्वीर को जारी किया। तस्वीर टेलीस्कोप के एक ग्लोबल नाटक की मदद से खींची गई है।

यह ब्लैक होल धरती से 5.4 करोड़ प्रकाश वर्ष (करीब 9.5 लाख करोड़ किलोमीटर) दूर एम-87 गैलेक्सी क स्थित है। यह उपलब्धि ऐसी ही है, जैसे धरती पर रहकर चांद पर रखे किसी छर्रे की तस्वीर खींचना। 


यह उपलब्धि 2012 में शुरू हुए इवेंट होराइजन टेलिस्कोप (ईएचटी) शोध का नतीजा है। अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ के रूप में शुरू किए गए इस शोध का उद्देश्य विभिन्न ब्लैक होल की नजदीक से जानकारी जुटाना है। वैज्ञानिकों को इस अध्ययन से जो जानकारी मिली है, उससे 1915 में अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा दिया गया सापेक्षता का सिद्धांत (थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी) और शेपर्ड डोलमैन ने कहा, 'हमने वह हसि आता पुष्ट हुआ है। इस उपलब्धि पर वैज्ञानिक कर लिया है, जिसे कुछ पीढ़ी असंभव माना जाता था। लोगों ने इस मौके पर महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को भी याद किया। हॉकिंग ने ब्लैक होल पर व्यापक अध्ययन किया था 1


दो ब्लैक होल के जुटाए डाटा ‌‌: वैज्ञानिकों ने एम-87 गैलेक्सी में स्थित ब्लैक होल की तस्वीर जारी की है, जो
धरती से 5.4 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है। इसका द्रव्यमान सूर्य से 6.5 अरब गुना है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने हमारी आकाशगंगा के मध्य में स्थित एक ब्लैक होल सगिट्टेरियस-का डाटा भी जुटाया है। सगिट्टेरियस-ए धरती से 26,000 प्रकाश वर्ष दूर है। इसका द्रव्यमान सूर्य से करीब 40लाख गुना है।


कैसे ली गई तस्वीर?

असल में किसी भी ब्लैक होल की तस्वीर लेना असंभव है। ब्लैक होल ऐसी संरचना है, जिससे प्रकाश भी वापस नहीं आता। ब्लैक होल की एक सीमा होती है, जिसमें पहुंचते ही कोई भी पिंड घूमते हुए धीरे-धीरे उसके केंद्र
में समा जाता है। ब्लैक होल में हर पल अनगिनत पिंड समा रहे होते हैं। इस प्रक्रिया में उसके चारों ओर प्रकाश
और तरंग का एक चक्र बन जाता है, जिससे छल्ले जैसी आकृति बनती है। वैज्ञानिकों ने ऐसी ही छल्ले की तस्वीर
खींची है।उन तरंगों के बीच दिख रहा काला हिस्सा ही ब्लैक होल है।



क्या होता है ब्लैक होल?

ब्लैक होल को अंतरिक्ष की सबसे रहस्यमयी संरचना कहा जाता है। इसका गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक होता है कि इसके पास से गुजरने वाला कोई भी खगोलीय पिंड इसमें समाहित हो जाता है। इस ब्लैक होल इसीलिए कहते हैं, क्योंकि प्रकाश भी इसमें लुप्त हो जाताहै। माना जाता है कि कोई विशाल तारा अपने अंतिम समय में ब्लैक होल में तब्दील हो जाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि हर गैलेक्सी के मध्य में ब्लैक होल हैं। जो लगातार अपने आसपास के खगोलीय पिंडों, हों और छोटे ब्लैक होल को अपने अंदर समेटते हुए अपना आकार बड़ा करते जा रहे हैं।


टुकड़ों को जोड़कर बनी तस्वीर

ईएचटी प्रोजेक्ट के तहत कई रेडियो टेलीस्कोप एंटीना को इस तरह जोड़ा गया ताकि वह एक टेलीस्कोप की तरह काम करें। अप्रैल 2017 में हवाई, एरिजोना, स्पेन, मेक्सिको, चिली और अंटार्कटिका में स्थापित टेलीस्कोप की मदद से पहला डाटा मिला था। उसके बाद फ्रांस और ग्रीनलैंड के टेलीस्कोप भी इसका हिस्सा बन गए। खगोलविद माइकल ब्रिमर ने कहा, 'हमने कई रेडियो टेलीस्कोप से ली गई तस्वीरों को इस तरह जोड़ा, जैसे वह किसी बड़े शीशे का टुकड़ा हों।

4 comments: